चाँद

“दुःख का दरिया सुख का सागर , इसके दम से देख लिया !
हमको अपने साथ ही लेकर डूबा और उभरा चाँद !!”

इब्न-e-इंशा

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चाँद

हमने तो किस्मत के डर से जब पायें , अंधियारे पायें
यह भी चाँद का सपना होगा , कैसा चाँद , कहाँ का चाँद ?