कागज़

” शुक्र करो हम दर्द सहते हैं , लिखते नहीं ,
वरना कागज़ों पर लफ़्ज़ों के जनाज़े होते “

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बेटा

” जिसने भी इस खबर को सुना सर पकड़ लिया ,
कल इक दिये ने आँधी का कालर पकड़ लिया !

उसकी रगो में दौड़ रहा था मेरा लहुँ ,
बेटे ने बढ़ के दस्त-ए -सितमगर पकड़ लिया!! “

RIP Nida Fazli

” बाहर झाड़ू हाँथ मैं , अन्दर भरी बबूल !
उसको भी तो साफ़ कर , तुझमे जो है धूल !!

गुमसुम गंगा घाट है, चुप चुप है गुजरात !
वादा करके सो गए,सब अच्छे दिन रात !! ”

RIP Nida Fazli