बेटा

” जिसने भी इस खबर को सुना सर पकड़ लिया ,
कल इक दिये ने आँधी का कालर पकड़ लिया !

उसकी रगो में दौड़ रहा था मेरा लहुँ ,
बेटे ने बढ़ के दस्त-ए -सितमगर पकड़ लिया!! “

RIP Nida Fazli

” बाहर झाड़ू हाँथ मैं , अन्दर भरी बबूल !
उसको भी तो साफ़ कर , तुझमे जो है धूल !!

गुमसुम गंगा घाट है, चुप चुप है गुजरात !
वादा करके सो गए,सब अच्छे दिन रात !! ”

RIP Nida Fazli

साल मुबारक

“इस साल ना हो पुरनम आँखें , इस साल ना वो ख़ामोशी हो
इस साल ना दिल को , भेहलाने वाली बेबस बेहोशी हो

इस साल मोहब्बत की दुनिया में ,दिल दिमाग की आँखें हो
इस साल हमारे हाथों मे ,आकाश चूमती पलकें हो

ये साल अगर इतनी मोहलत ,दिलवा जाये तो अच्छा हैं
ये साल अगर हमसे हमको, मिलवाजायें तो अच्छा हैं

चाहे दिल की बनजर धरती ,सागर भर आाँसों पी जाएँ
ये साल मगर कुछ फूल नये , खिलवा जाये तो अच्छा तो अच्छा है

ये साल हमारी किस्मत को, कुछ नए ढंग से आंकेगा
ये साल हमारी हिम्मत में, कुछ नए सितारे टाकेगा

इस साल अगर अंदर , दुःख की बदली को हटा सके
तो मुमकिन हैं इस साल ,हम सब में सूरज झाकेंगा “